कभी-कभी मन बहुत भारी हो जाता है।
ना वजह समझ आती है, ना समाधान दिखता है। ऐसे समय में खाटू श्याम जी का नाम अपने आप होंठों पर आ जाता है।
श्याम बाबा सिर्फ एक आराध्य नहीं हैं।
वो भरोसा हैं।
वो ठहराव हैं।
और सबसे बड़ी बात, वो हारे हुए मन का सहारा हैं।
खाटू श्याम जी की आरती केवल एक धार्मिक पाठ नहीं है।
यह दिल से निकली हुई पुकार है।
जब शब्द कम पड़ जाते हैं, तब आरती बोलती है।
इस लेख में आपको खाटू श्याम जी कीआरतियाँ मिलेंगी।
सरल शब्दों में।
सच्चे भाव के साथ।
ऐसे जैसे कोई भक्त सामने बैठकर गा रहा हो।
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🔱 आरती 1:
ॐ जय श्री श्याम हरे,
बाबा जय श्री श्याम हरे।
खाटू की पावन धरती पर,
आप विराजे सदा खरे।
ॐ जय श्री श्याम हरे॥
रत्नों से सजा आसन तेरा,
मस्तक पर चंवर डोले।
केसरिया तन, शांत छवि,
मन हर ले, दिल बोले।
ॐ जय श्री श्याम हरे॥
कानों में कुंडल चमकें,
गले फूलों की धार।
मुकुट शोभे शीश पे बाबा,
जैसे चाँद सितार।
ॐ जय श्री श्याम हरे॥
धूप जले, दीपक दमके,
महके पूरा धाम।
कंठ से निकले नाम तेरा,
श्याम… बस श्याम।
ॐ जय श्री श्याम हरे॥
खीर-चूरमा, मोदक मीठे,
सोने की थाली में।
सेवा में जो जीवन अर्पे,
रहता तेरी डाली में।
ॐ जय श्री श्याम हरे॥
शंख बजे, मृदंग गूँजे,
घड़ियाल की तान।
भक्त खड़े जयकार करें,
गूँजे तेरा नाम।
ॐ जय श्री श्याम हरे॥
जो भी ध्यावे मन से बाबा,
उसका दुख हर लो।
श्याम-श्याम जो कहे सदा,
उसका जीवन भर दो।
ॐ जय श्री श्याम हरे॥
🔱 आरती 2: (भावुक, धीमी लय)
जय जय खाटू नरेश हमारे,
श्याम सलोने लाल।
हारे का सहारा कहलाए,
दीनों के रखवाल।
जय जय खाटू नरेश॥
नीली छत्री, मोर पंख,
मुख पर करुणा छाई।
देख तुझे, थकन मिटे,
आँखों में ठंडक आई।
जय जय खाटू नरेश॥
जो न बोले, तू सुन लेता,
जो न माँगे, दे दे।
टूटे मन को जोड़ के बाबा,
फिर से जीने दे दे।
जय जय खाटू नरेश॥
खाटू की गलियों में बाबा,
आज भी तू चलता है।
जो भी सच्चा प्रेम करे,
उससे तू मिलता है।
जय जय खाटू नरेश॥
🔱 आरती 3: (लोक-भाव, सरल शब्द)
ॐ श्याम श्याम गुन गावे,
मनवा हरषाए।
खाटू वाले बाबा मेरे,
कष्ट सभी हर जाए।
ॐ श्याम श्याम॥
रूठे भाग्य को तू मनाए,
सूनी झोली भरे।
जिसने तुझको दिल से माना,
उसके संकट टरे।
ॐ श्याम श्याम॥
ना देखे तू जात-पात,
ना धन का मोल।
सच्ची भक्ति माँगे बाबा,
बाकी सब अनमोल।
ॐ श्याम श्याम॥
हार के जो तेरे द्वार खड़ा,
जीत वही पाता।
नाम तेरा जो ले ले मन से,
वो फिर न घबराता।
ॐ श्याम श्याम॥
🔱 आरती 4: (शांत, ध्यान वाली)
ॐ नमः श्री श्याम देवाय,
करुणा के सागर।
तू ही मेरा विश्वास बना,
जब डगमगाए पाँव अगर।
ॐ नमः श्री श्याम॥
साँस-साँस में नाम तेरा,
मन में उजियारा।
अंधेरे जब पास आए,
तू बन गया सहारा।
ॐ नमः श्री श्याम॥
ना माँगू मैं सोना-चाँदी,
ना ही राज-पाट।
बस चरणों में जगह मिले,
इतनी सी है बात।
ॐ नमः श्री श्याम॥
खाटू वाले श्याम हमारे,
सदा संग रहना।
भूल-चूक जो हो जाए हमसे,
उसको भी सहना।
ॐ नमः श्री श्याम॥
Conclusion
खाटू श्याम जी की भक्ति किसी नियम में नहीं बंधती।
यह शोर में भी हो सकती है, और पूर्ण मौन में भी।
आरती गाने के लिए सही समय या सही जगह जरूरी नहीं।
जरूरी है तो बस मन का झुक जाना।
अगर इन आरतियों को पढ़ते हुए आपका मन थोड़ा भी शांत हुआ हो,
या आँखें अपने आप नम हो गई हों,
तो समझिए बाबा ने सुन लिया।
खाटू वाले श्याम,
जो बिना कहे सब समझ लेते हैं।
इन्हीं भावों के साथ,
श्याम बाबा से यही प्रार्थना है कि
आपके जीवन में विश्वास बना रहे,
और जब भी मन हारे…
तो श्याम का नाम साथ रहे।
जय श्री श्याम।